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जरूरत से ज्यादा सिंचाई जमीन बंजर बना देती हैं

आज हम देश के ऐसे किसान के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके 100 एकड़ जमीन बंजर हो चुकी थी और 600 एकड़ जमीन बंजर होने की कगार पर थी. जी हां हम बात करने जा रहे हैं विनायक पाटिल की. विनायक पाटिल ने अपने एक फैसले से अपनी बाकी बची हुई 600 एकड़ जमीन को बंजर होने से बचा लिया और अब वह दूसरे किसानों को वह तरीका बता रहें हैं.विनायक पाटिल ने अपनी 600 एकड़ जमीन को ‘ड्रिप इरीगेशन’ की मदद से बंजर होने से बचाया हैं. यह एक ऑटोमैटिक सिस्टम होता हैं, पौधों को पानी बूँद-बूँद के जरिये उनकी जरूरत के मुताबिक मिलता हैं. इससे पानी की बहुत ज्यादा मात्रा में बचत भी होती है और जमीन बंजर होने से भी बचती हैं.

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विनायक पाटिल कहते है की हमने सिर्फ पानी ही नहीं बल्कि खाद और फर्टीलाइजर का इस्तेमाल भी इसी ‘ड्रिप इरीगेशन’ की मदद से किया हैं. उनका कहना है की शुरुआत में हर पौधे के ऊपर एक ड्रिप लगाई थी और उसे कंट्रोल करने के लिए बहुत ज्यादा समय खर्च हो रहा था.इसलिए फिर टेक्नोलॉजी का सहारा लिया गया और इस ‘ड्रिप इरीगेशन’ को कंप्यूटर के साथ जोड़ दिया. ऐसे में पौधों को जब भी पानी की जरूरत होती हैं, हम कंट्रोल रूम से कमांड दे देते हैं जिससे पानी दिया और बंद किया जा सकता हैं. पाटिल कहते हैं की हमने इससे 60 से 65 प्रतिशत पानी, खाद और फर्टीलाइजर की बचत की हैं. ‘ड्रिप इरीगेशन’ की मदद से पानी, खाद और फर्टीलाइजर पौधे को मात्र उतनी ही मात्रा में जाता है जितनी उसको जरूरत होती हैं.

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इससे दो प्रमुख फायदे हैं पहला तो कम पानी, खाद और फर्टीलाइजर इस्तेमाल होने पर आपके बहुत ज्यादा पैसों की बचत होती हैं. दूसरा आपकी बहुमूल्य जमीन बंजर होने से बच जाती हैं. पाटिल ने कहा की मैंने यह उपयोग अपनी 100 एकड़ जमीन के बंजर होने के बाद किया, लेकिन मैं नहीं चाहता की किसी किसान की जमीन अधिक सिंचाई की वजह से बंजर हो जाये. इसलिए उनसे निवेदन है की खेतों की मिटटी की जांच समय-समय पर करवाते रहें और ‘ड्रिप इरीगेशन’ का प्रयोग जरूर करें.
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