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शास्त्रों के अनुसार भाद्रपद पूर्णिमा के व्रत-पूजा की विधि

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार भाद्रपद माह में आने वाली शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को ही भाद्रपद पूर्णिमा के नाम से जाना जाता हैं. हिन्दू धर्म में भाद्रपद की पूर्णिमा की मान्यता इसलिए भी बहुत ज्यादा हैं क्योंकि इसी के साथ पितृपक्ष यानी श्राद्ध शुरू होते हैं. 2020 में भाद्रपद की पूर्णिमा 2 सितंबर यानी आज है और आज से श्राद्ध शुरू होकर 17 सितंबर तक रहेंगे.शास्त्रों के अनुसार जो भी इंसान अपनी इच्छा शक्ति और श्रद्धा से भाद्रपद की पूर्णिमा को भगवान सत्य नारायण की पूजा करता है और एक दिन उमा महेश्वर का उपवास रखता हैं. उसके जीवन के कई कष्ट दूर हो जाते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आना शुरू हो जाती हैं. भाद्रपद पूर्णिमा के दिन किसी नदी या कुंड में स्नान करने का भी विशेष महत्व हैं. लेकिन अगर आपके घर के आस-पास नदी या कुंड न हो तो आप पानी में गंगा जल डालकर भी भगवान् का नाम लेते हुए स्नान कर सकते हैं.

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भाद्रपद की पूर्णिमा के दिन दान पुण्य का भी विशेष महत्व होता हैं. ऐसे में आप किसी जरूरतमंद इंसान को कुछ कपडे दे सकते हैं या भोजन करवा सकते हैं. अगर आप ऐसे इलाके में रहते हैं जहां ऐसा कोई न मिले जिसे आप दान में कपडे दे सके या फिर भोजन करवा सके तो आप नजदीकी मंदिर में जाकर पंडित को वह दान दे सकते हैं.हिन्दू धर्म में ऐसी मान्यता है की जो महिला उमा महेश्वर व्रत के दौरान भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना करती है. उस महिला को बुद्धिमान संतान, और सौभाग्य प्राप्त होता हैं. इस व्रत का लेख हमें मत्स्य पुराण में पढ़ने को मिलता हैं. उमा महेश्वर व्रत की कथा की बात करें तो ऐसा माना जाता है की, एक बार की बात है जब महर्षि दुर्वासा भगवान शंकर जी से मिलकर वापिस लौट रहे थे और रास्ते में उनकी मुलाक़ात भगवान् विष्णु जी से हो गयी.महर्षि दुर्वासा ने भगवान् शिव से मिली हुई विल्व पत्र की माला को भगवान् विष्णु को अर्पित कर दिया. भगवान विष्णु ने भी वह माला खुद न पहनते हुए आगे गरुड़ के गले में डाल दी. यह देखकर महर्षि दुर्वासा क्रोधित हो गए और भगवान् विष्णु से कहा की, “तुमने भगवान शंकर का अपमान किया है. इससे तुम्हारी लक्ष्मी चली जाएगी. क्षीर सागर से भी तुम्हे हाथ धोना पड़ेगा और शेषनाग भी तुम्हारी सहायता न कर सकेंगे.”

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भगवान विष्णु जी ने फिर क्षमा मांगते हुए महर्षि दुर्वासा से इस श्राप से मुक्त होने का उपाय माँगा. जिसके बाद महर्षि दुर्वासा ने कहा की उमा-महेश्वर का व्रत करो जिसके बाद ही आपको आपकी शक्तियां वापिस मिलेंगी. भगवान विष्णु ने महर्षि दुर्वासा के कहे अनुसार इस व्रत को पूरा किया और फिर उन्हें लक्ष्मी जी समेत समस्त शक्तियाँ पुनः मिल गईं.
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